ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने उमर अब्दुल्ला और सारा खान (सारा अली) के मामलों पर फतवे जारी करने का दावा किया है। बरेली स्थित मौलाना रजवी के अनुसार उमर अब्दुल्ला और निधि राजदान के निकाह को शरीयत के खिलाफ बताया गया है। इसके अलावा सारा अली द्वारा केदारनाथ मंदिर में जाने और पूजा करने को भी इस्लाम में गुनाह बताया गया है।

उलेमाओं की प्रतिक्रिया और कानूनी स्थिति

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी के इन दावों और बयानों पर उलेमाओं की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। राष्ट्रीय उलेमा संसद के अध्यक्ष डॉ. मौलाना कल्बे रुसैद रिजवी ने बिना मांगे फतवा जारी करने की परंपरा पर गंभीर सवाल उठाया है।

भारतीय कानून और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट नियमों के अनुसार फतवे की देश में कोई कानूनी मान्यता या बाध्यता नहीं होती है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह स्पष्ट नहीं है कि सारा अली खान या उमर अब्दुल्ला द्वारा वाकई कोई औपचारिक स्पष्टीकरण या तौबा की गई है या नहीं। साथ ही, इन फतवों के पीछे मौलाना रजवी के दावों के अलावा अन्य धार्मिक संगठनों का कोई अन्य आधिकारिक रुख अभी सामने नहीं आया है।