खातेगांव टीआई दिलीप पुरी की हत्या के मामले में पुलिस ने अवैध शराब तस्करी के एक बड़े सिंडिकेट का खुलासा किया है। टीआई को कुचलने वाला ट्रक अवैध शराब की खेप लेकर गुजरात जा रहा था।
जांच में सामने आया है कि टिमरनी की तीन लाइसेंसी शराब दुकानों के लाइसेंस पाटेन्द्र जायसवाल के नाम पर थे, लेकिन इस कारोबार को चार पार्टनर मिलकर चलाते थे। सिंडिकेट का मुख्य संचालक राहुल जायसवाल था जो स्टॉक उठाने, सप्लाई रूट तय करने और पूरा हिसाब रखता था।
चार पार्टनर मिलकर चलाते थे अवैध शराब सिंडिकेट
इस अवैध कारोबार में राहुल, मनीष और मोहिन जायसवाल को 30-30 प्रतिशत हिस्सा मिलता था, जबकि पाटेन्द्र जायसवाल को 10 प्रतिशत हिस्सा दिया जाता था। खातेगांव में पकड़े गए ट्रक में करीब 1,400 पेटियां शराब लदी थीं जिसे देवास के रास्ते गुजरात पहुंचाया जाना था।
गुजरात में शराब की यह खेप पहुंचाने पर एक ट्रक पर 8 से 10 लाख रुपए तक का मुनाफा होता था। डीजीपी उपेंद्र जैन के अनुसार इस शराब तस्करी नेटवर्क की पूरी पहचान कर ली गई है।
13 आरोपी हिरासत में और आबकारी अधिकारी निलंबित
कार्रवाई के तहत 13 आरोपियों को हिरासत में लिया गया है और तीनों शराब दुकानों के लाइसेंस निलंबित कर उन्हें सील कर दिया गया है। इसके अलावा, हरदा के सहायक जिला आबकारी अधिकारी अमरसिंह बघेल और दो आरक्षकों को भी निलंबित किया गया है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मामले में टीआई की पत्नी को सब इंस्पेक्टर पद और परिवार को 1 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।









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