जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि ने प्रकृति और जीवों की परस्पर निर्भरता पर अपने जीवन सूत्र प्रस्तुत किए हैं। उनके अनुसार संसार में मनुष्य, जीव-जंतु, पेड़-पौधे और सूक्ष्म जीव एक-दूसरे पर निर्भर हैं।
सभी जीवों की संरचना और आवश्यकताएं अलग होने के बावजूद वे एक ही प्राकृतिक व्यवस्था का हिस्सा हैं। पेड़-पौधे ऑक्सीजन प्रदान करते हैं और विभिन्न जीव खाद्य श्रृंखला को बनाए रखते हैं।
प्राकृतिक व्यवस्था और मनुष्य की निर्भरता
मनुष्य अपनी मूल आवश्यकताओं के लिए प्रकृति पर पूरी तरह निर्भर है। वह भोजन, जल, वायु और औषधियों के लिए प्रकृति से जुड़ा हुआ है।






पाठकों की राय