मस्कट कोर्ट ऑफ अपील ने आठ अक्टूबर 2026 को सौरभ चंद्राकर के प्रत्यर्पण मामले में फैसला सुनाया था। भारत ने 12 जुलाई 2026 को ओमान की अदालत में प्रत्यर्पण की मांग की थी, जबकि संयुक्त अरब अमीरात ने 14 जुलाई को याचिका दी थी।
मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने 30 अगस्त 2026 को पत्र के माध्यम से पुष्टि की थी कि सौरभ चंद्राकर भारतीय नागरिक है। इसके बाद ओमान की अदालत ने भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध को स्वीकार कर लिया और यूएई की याचिका खारिज कर दी।
बचाव पक्ष के तर्क और प्रत्यर्पण
बचाव पक्ष का दावा है कि सौरभ चंद्राकर ने 2020 में भारतीय नागरिकता छोड़ दी थी और वह वानुअतु का नागरिक है। बचाव पक्ष का यह भी तर्क था कि ओमान से प्रत्यर्पण की मंजूरी केवल प्रवर्तन निदेशालय के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मिली है।
सौरभ चंद्राकर को एक नवंबर 2026 को ओमान से भारत लाया गया और दो नवंबर को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने आरोपी को रायपुर कोर्ट में पेश करने के लिए दो दिन की ट्रांजिट रिमांड दी है।









पाठकों की राय