रतलाम जिले के आलोट-जावरा हाईवे से ढाई किलोमीटर अंदर बसे कछालिया गांव में एक अनोखी परंपरा चली आ रही है। यहां पिछले लगभग 700 वर्षों से घरों की दीवारों पर रंग या पुताई न करने की परंपरा का पालन किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत इस गांव में लगभग 100 नए मकान बने हैं, लेकिन इन पर भी पुरानी परंपरा का असर है। ग्रामीण बद्रीलाल धाकड़ के अनुसार, घरों पर रंग कराने से किसी अनहोनी का अंदेशा माना जाता है।
सरकारी मकानों पर भी लागू है परंपरा
सरपंच प्रतिनिधि जगदीश पुरी गोस्वामी ने स्पष्ट किया है कि यह नियम सरकारी और निजी दोनों तरह के मकानों पर एक समान रूप से लागू होता है। इस गांव में काले रंग के कपड़े पहनने और जूते-मोजे पहनने से भी परहेज किया जाता है।









पाठकों की राय