कृत्तिवास रामायण की रचना 15वीं सदी में कवि कृत्तिवास ओझा द्वारा बांग्ला भाषा में की गई थी। इस ग्रंथ में श्रीराम और लंका युद्ध से जुड़े कई प्रमुख प्रसंगों का वर्णन मिलता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, श्रीराम ने लंका युद्ध के दौरान ब्रह्माजी के कहने पर देवी माहेश्वरी की पूजा की थी। वहीं, विभीषण ने श्रीराम को बताया कि रावण की मृत्यु उसकी नाभि में ब्रह्मास्त्र प्रविष्ट होने से होगी।
लंका युद्ध और प्रमुख प्रसंग
ग्रंथ में अन्य घटनाओं का भी उल्लेख है, जिसके तहत हनुमान जी वृद्ध ब्राह्मण का भेष धरकर मन्दोदरी के अन्तःपुर में गए थे। इसके अलावा, विभीषण के पुत्र तरणीसेन ने श्रीराम के साथ युद्ध में वीरगति प्राप्त की थी।
एक अन्य प्रसंग में लक्ष्मण ने धनुष से सेतु के तीन पत्थर खिसकाकर उसे तोड़ा और दस योजन का रास्ता बनाया था। हालांकि, इन पौराणिक कथाओं में वर्णित घटनाओं की ऐतिहासिक सत्यता का कोई स्वतंत्र प्रमाण नहीं है।







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