आनंद रामायण की रचना 15वीं सदी में हुई थी। इसके विभिन्न प्रसंगों में कई पौराणिक कथाओं का विवरण मिलता है। हालांकि, आनंद रामायण में वर्णित इन घटनाओं की ऐतिहासिक सत्यता की पुष्टि नहीं है।

प्रसंग एक के अनुसार, राजा दशरथ और कौशल्या के विवाह से पांच दिन पहले रावण ने कौशल्या का हरण किया था। वहीं प्रसंग दो के अनुसार, चैत्र शुक्ल रामनवमी के दिन श्रीराम और सीता ऋषि-मुनियों को दान दे रहे थे।

विवाह और वनवास से जुड़े प्रसंग

प्रसंग चार के अनुसार, राजा जनक और उनकी पत्नी सुमेधा ने वाल्मीकि आश्रम में पाँच साल बिताए थे। इसी प्रसंग में बताया गया है कि सीता को आठवाँ महीना लगने पर श्रीराम ने उन्हें वन में छोड़ने की बात कही थी।