छत्तीसगढ़ 1 नवंबर 2000 को एक अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया था। इस नए राज्य के गठन के पीछे एक लंबा और ऐतिहासिक आंदोलन शामिल रहा है, जिसकी शुरुआत दशकों पहले हो चुकी थी।

छत्तीसगढ़ी समाज की स्थापना और शुरुआती सम्मेलन

छत्तीसगढ़ी समाज की स्थापना 16 मई 1965 को हुई थी। इसके बाद साल 1967 में रायपुर के ईदगाह भाटा में एक सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें अलग राज्य की मांग के लिए 5 हजार हस्ताक्षर जुटाए गए थे।

आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए 23 अक्टूबर 1978 को रायपुर में एक बड़ी रैली निकाली गई। इसके बाद 2 दिसंबर को छत्तीसगढ़ी समाज के 15 प्रतिनिधि प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई से मिलने दिल्ली गए थे। आंदोलन के अंतिम चरण में छत्तीसगढ़ी समाज पार्टी के नेतृत्व में 24 जुलाई 2000 को संसद का घेराव भी किया गया था।