रांची में नौकरी करने वाले 28 वर्षीय एक युवक ने त्योहारों के दौरान बचपन के ट्रॉमा और बेचैनी से जुड़ी मानसिक स्थिति साझा की है। उन्होंने बताया कि बचपन में उनके पिता शराब पीकर झगड़ा करते थे और त्योहारों के समय स्थिति और अधिक बिगड़ जाती थी। हालांकि, अब वह व्यक्ति आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है और अपने घर से दूर रहता है।
आयरलैंड और यूके के कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट डॉ. द्रोण शर्मा के अनुसार, बचपन के बुरे अनुभवों का असर कई साल बाद भी त्योहारों के दौरान बेचैनी या नींद खराब होने के रूप में सामने आ सकता है।
बचपन के ट्रॉमा और PTSD के लक्षण
विशेषज्ञ ने पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर यानी PTSD की संभावना के लिए कुछ प्रमुख लक्षणों पर ध्यान देने की सलाह दी है। इनमें इंट्रूजन, अवॉइडेंस और हाइटेंड थ्रेट जैसे लक्षण शामिल हैं। हालांकि, केवल इन लक्षणों के आधार पर यह पुष्टि नहीं की जा सकती कि व्यक्ति को वास्तव में PTSD है या नहीं।









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