सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद हिमाचल प्रदेश में भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के बिजली एरियर को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राज्य के विभिन्न दलों के नेता इस कानूनी सफलता का श्रेय अपनी और पुरानी सरकारों को दे रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस अदालती परिणाम को पिछले तीन दशकों के दौरान प्रदेश में रहीं सभी सरकारों के मिले-जुले प्रयासों का परिणाम करार दिया है।
नेताओं के अलग-अलग दावे
दूसरी ओर, भाजपा नेता राजीव बिंदल ने इसका विशेष श्रेय साल 2011 में तत्कालीन धूमल सरकार के प्रयासों को दिया है। उनके अनुसार, केंद्र की मौजूदा सरकार के कैशलेस सेटलमेंट फॉर्मूले के तहत राज्य को ग्यारह हजार नौ सौ तिहत्तर मिलियन यूनिट बिजली प्राप्त होगी।
न्यायालय ने इस बकाये के भुगतान को पूरा करने के लिए बीस वर्ष की एक लंबी समयसीमा तय की है।









पाठकों की राय