दिवाली और करवा चौथ जैसे त्योहारों के दौरान कामकाज और घरेलू जिम्मेदारियों का दबाव अक्सर बढ़ जाता है। नोएडा में कार्यरत क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. जया सुकुल के अनुसार, इस स्थिति में मानसिक तनाव और थकान होना स्वाभाविक है, जिससे पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन दोनों प्रभावित होते हैं।

अक्सर कामकाजी महिलाओं को घर की सभी रस्में और तैयारियां अकेले ही संभालनी पड़ती हैं, जिसके साथ कार्यालय के लक्ष्यों को पूरा करना कठिन हो जाता है। इस मामले में भी महिला को पेशेवर कर्तव्यों के साथ पारंपरिक दायित्वों का निर्वहन एक साथ करना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस प्रकार के दबाव को कम करने के लिए कार्यस्थल पर समय प्रबंधन और घर के सदस्यों के बीच सहयोग बेहद जरूरी है। हालांकि, परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा इस कार्यभार को साझा करने को लेकर कोई आधिकारिक या पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।

इस तरह की परिस्थितियों में स्पष्ट संवाद और प्राथमिकताओं का निर्धारण करना मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद कर सकता है। त्योहार के दिन उत्पन्न होने वाली इन व्यावहारिक कठिनाइयों के दीर्घकालिक समाधान पर अभी और विचार किया जाना बाकी है।