सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि वैध तरीके से भारत में प्रवेश करने वाला विदेशी नागरिक गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के मामलों में जमानत पा सकता है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और एनआईए की अपील को खारिज कर दिया।

अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसके तहत 12 दिसंबर 2023 को आरोपी मोहम्मद रिफास उर्फ मोहम्मद रिगबास की जमानत बहाल की गई थी। आरोपी के खिलाफ धार्मिक समुदायों के बीच तनाव फैलाने, साजिश रचने और फर्जी पहचान पत्र बनवाने के आरोप दर्ज हैं।

कार्रवाई के दौरान एनआईए यह साबित करने में असफल रही कि आरोपी अवैध रूप से देश में दाखिल हुआ था। एजेंसी के अपने रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी वर्ष 2009 में वैध वीजा लेकर भारत आया था।

इससे पहले जुलाई 2018 में ट्रायल कोर्ट ने निर्धारित समय के भीतर चार्जशीट दाखिल न किए जाने के कारण आरोपी को डिफॉल्ट जमानत दी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से कानूनी मजबूती मिली है।