भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रोपड़, पंजाब ने शोधार्थियों के लिए एक नए स्टार्टअप-ड्रिवन PhD पाथवे की शुरुआत की है। इस मॉडल के तहत छात्रों को पारंपरिक रूप से लंबी थीसिस लिखने की अनिवार्यता से छूट दी जाएगी और इसके बजाय उन्हें स्टार्टअप मॉडल या व्यावहारिक प्रोडक्ट के आधार पर PhD की डिग्री प्रदान की जाएगी। इस तरह की अनूठी पहल शुरू करने वाला IIT रोपड़ देश का पहला आईआईटी संस्थान बन गया है।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के वर्तमान नियमों के अनुसार भारत में किसी भी PhD पाठ्यक्रम की न्यूनतम अवधि 3 वर्ष और अधिकतम अवधि 6 वर्ष निर्धारित की गई है। इस नए मॉडल के तहत भी इन नियमों का पालन किया जाएगा या नहीं, इस संबंध में अभी तक पूरी स्पष्टता सामने नहीं आई है।

इसी तर्ज पर देश के अन्य संस्थानों में भी प्रयास किए जा रहे हैं। भारत में पिलानी स्थित BITS संस्थान में पहले से ही WHILSP नाम से एक समान प्रोग्राम चलाया जा रहा है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर भी इस तरह के उदाहरण सामने आ चुके हैं, जिसमें फरवरी 2026 में चीन ने एक सिविल इंजीनियरिंग स्कॉलर को बिना थीसिस लिखे केवल प्रैक्टिकल प्रोडक्ट तैयार करने पर PhD की डिग्री दी थी।

हालांकि, यह नया स्टार्टअप-ड्रिवन PhD मॉडल देश के अन्य सभी प्रमुख तकनीकी और उच्च शिक्षण संस्थानों में अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा या नहीं, इस बारे में अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है और इस पर विचार किया जाना बाकी है।