राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा से जुड़े जिलों में बच्चियों की खरीद-फरोख्त कर उन्हें मुंबई, पुणे तथा नागपुर भेजने का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। एक मीडिया पड़ताल में यह खुलासा हुआ है कि इन राज्यों के सीमावर्ती इलाकों में गरीब परिवारों द्वारा बच्चियों को दलालों या रिश्तेदारों को सौंपा जा रहा है।

स्टांप पेपर पर गोदनामे और सौदे

पड़ताल के दौरान झालावाड़, बूंदी और मंदसौर जिलों में ऐसे मामले सामने आए हैं जहां कर्ज और गरीबी के कारण परिवारों ने बच्चियों को दूसरों के हवाले किया। इसके लिए स्टांप पेपर पर गोदनामे के दस्तावेज भी मिले हैं। दलालों द्वारा 8 साल के एग्रीमेंट और 25 से 30 लाख रुपए तक की रेट तय करने की बात भी सामने आई है।

इन इलाकों से लाई जाने वाली लड़कियों को मुंबई के बार और देह व्यापार के नेटवर्क में धकेला जा रहा है। वहां उनकी उम्र, नाम और पहचान बदलकर अवैध धंधे में इस्तेमाल किया जाता है। मुंबई के देवनार बालिका गृह में पिछले पांच साल में मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित अन्य राज्यों की 34 नाबालिग बेटियों के निरुद्ध होने की जानकारी मिली है।